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Wednesday, January 23, 2013

मन बंजारा रहने दो

मन बंजारा रहने दो 
मुझे अनजाना  रहने दो 

गीत मेरे अश्रु हैं 
मुझे  अनगाया  रहने दो 
मन बंजारा रहने दो
मुझे अनजाना  रहने दो 


अक्षर अक्षर कटती हूँ 
मुझे अनकहा रहने दो 
मन बंजारा रहने दो
मुझे अनजाना  रहने दो 

शब्दों का व्यापार है दुनिया 
मुझे अनजाया  रहने दो 
मन बंजारा रहने दो
मुझे अनजाना  रहने दो 

सपनों  से भारी पाँखे  है 
मुझे बिसराया रहने दो 
मन बंजारा रहने दो
मुझे अनजाना  रहने दो

भाव खोज लेंगे किनारे अपने
मुझे धारा ही रहने दो 
मन बंजारा रहने दो 
मुझे अनजाना रहने दो 

मन के लिए लिखती हूँ 
मुझे पराया रहने दो 
मन बंजारा रहने दो
मुझे अनजाना  रहने दो 
मनीषा 

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