Pages

Wednesday, March 25, 2015

कुछ आँचल के साये

कुछ आँचल के साये इस कदर रूठ जाते हैं 
बात बात पर याद आते हैं 
दिल पूछता है हर लम्हें से 
जाने वाले क्या हमारी सदा सुन पाते हैं 
ऐसे जाते हैं जो क्यों मुँह फेर जाते हैं 
जाने वाली क्यों कभी लौट कर नहीं आ पाते हैं 
कहते हैं वो आसमां के तारों में मुस्काते हैं 
उनकी याद में जब हम अश्रु बहाते हैं 
हमसे मिलने के लिए शायद वो भी छटपटाते हैं
और जब भी उन्हें याद कर हम मुस्काते हैं 
धरा की हर शह में वो हमारे संग गुनगुनाते हैं 
मनीषा

No comments:

Post a Comment